• सीएए-एनपीआर-एनआरसी के ख़िलाफ़ अखिल भारतीय लेखक-कलाकार सम्मेलन- ‘हम देखेंगे’

    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट

    February 19, 2020

    सीएए-एनपीआर-एनआरसी के ख़िलाफ़ देशभर में विरोध बढ़ता जा रहा है और साथ ही दमन भी। आज तो कर्नाटक से ख़बर है कि कोप्पल ज़िले में एक सरकारी कार्यक्रम में सीएए विरोधी कविता पढ़ने के मामले में एक कवि और एक पत्रकार को गिरफ़्तार किया गया है। भाजपा के एक पदाधिकारी की शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई है। ऐसे हालात में लेखक-कलाकारों के कई संगठनों ने एकजुट होकर इस पूरी 'परियोजना' का विरोध करने का फ़ैसला किया है। इसके तहत पहली मार्च को दिन में 11 बजे से दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'हम देखेंगे’ नाम से अखिल भारतीय लेखक-कलाकार सम्मेलन होगा।

    दलित लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव, इंडियन कल्चर फोरम, जन संस्कृति, जन नाट्य मंच, विकल्प और दिल्ली विज्ञान मंच के साझे प्रयास के तहत सीएए-एनपीआर-एनआरसी के ख़िलाफ़ देश भर के लेखकों-कलाकारों का यह जुटान होगा।

    इन संगठनों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कुछ संगठनों द्वारा इसकी पहल की गई,लेकिन यह लेखकों कलाकारों की इस व्यापक भावना का इज़हार है कि यह अवाम के साथ मजबूती के साथ खड़े होने का वक़्त है।

    उनके मुताबिक लोकतंत्र पर मंडराता संकट खामख़याली नहीं है।

    बयान के मुताबिक "सीएए-एनपीआर-एनआरसी परियोजना हर एक भारतीय की नागरिकता पर संशय खड़ा कर नागरिक को राज्य का मोहताज बना देती है। साथ ही, 'नागरिकता देने' की प्रक्रिया में धर्म के आधार पर भेदभाव को कानूनी जामा पहना कर धर्म को राष्ट्र के प्रति नागरिक की वफ़ादारीकी कसौटी बना देती है।

    यह भारत के संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय स्वप्न पर एक गम्भीर चोट है।

    इसके ख़िलाफ़ देश भर में चल रहे सत्याग्रहों के बावज़ूद सरकार संवाद को दरकिनार कर सम्पूर्ण दमन पर आमादा है।

    आज देश का लेखक कलाकार समाज बेचैन है, क्योंकि यह साफ है कि इस वक़्त अगर जनता हार गई तो साहित्य और कलाएं अपने होने का प्रयोजन ही खो देंगी।

    यह एक रज़ाकाराना मुहिम हैं। लेखक कलाकार स्वेच्छा से इसमें शरीक हो रहे हैं। आप भी आइए। इसमें हर सजग लेखक कलाकार की सहभागिता जरूरी है।"


    सौजन्य न्यूज़क्लिक.

    Donate to the Indian Writers' Forum, a public trust that belongs to all of us.