• रक्त

    सलिल चतुर्वेदी

    September 8, 2017


    Image Courtesy: Patrika


    रक्त रक्त रक्त!

    हर वक्त वक्त वक्त!


    खेतों में रक्त, सड़कों में रक्त

    वोटों में रक्त, कोर्टों में रक्त

    वर्णों का रक्त, वर्गों का रक्त

    इस देश का आधार है यह

    रक्त रक्त रक्त!


    दुर्गा का रक्त, दरगाह का रक्त

    काली का रक्त, या अली का रक्त

    कलबुर्गी का रक्त, पनसारे का रक्त

    दाभोलकर का रक्त, गौरी लंकेश का रक्त

    इस देश को सींचता यह

    रक्त रक्त रक्त!


    हाथों से रक्त, माथों से रक्त

    आँखों से रक्त, जाँघों से रक्त

    कशमीर से रक्त, केरल से रक्त

    हर प्रांत के हर पोर से

    रक्त रक्त रक्त!


    इंक़लाब ज़िंदाबाद!

    रक्त रक्त रक्त!


    मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा!

    रक्त रक्त रक्त!


    हे राम!

    रक्त रक्त रक्त!


    इतिहास से नहीं सीखता यह

    रक्त रक्त रक्त!

    हर वक्त वक्त वक्त!

    उफ़! यह रक्त रक्त रक्त!


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    Salil Chaturvedi writes short fiction and poetry. He was the Asia region winner of the Commonwealth Short Story Competition, 2008. His stories have appeared in various anthologies and magazines, including Himal, Indian Literature, Indian Quarterly, Out of Print, Anti-Serious, etc. His poetry has appeared in Tadbhav, Guftugu, The Sunflower Collective, Indian Quarterly, etc. He loves marginal spaces and currently lives in Goa.

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